मेरा ब्लॉग
बुधवार, 14 सितम्बर 2011
अब ये हिंदी का श्राद्ध पक्ष नहीं , उत्सव हैं
रविवार, 26 जून 2011
तब महंगाई पर आंदोलन करने वाली थी सोनिया जी,अब...?
“आम आदमी की रोजमर्रा जरूरत की चीजों के दाम आसमान को छु रहे हैं. पेट्रोल, डीजल,रसोई गैस और किरासिन के दाम लगातार बढाये जा रहे हैं. आम आदमी की जिदंगी महंगाई और भ्रष्टाचार ने बहुत मुश्किल कर दी हैं.ये बहुत बड़ा चेलेंज हैं. हमें केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ेगा ”
-कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
( 9 अक्टूबर 2000 को छिंदवाडा के कांग्रेस भवन का उद्घाटन समारोह में भाषण)
सोनिया गांधी का ये बयान आज उनकी यूपीए सरकार पर सटीक बैठता हैं, लेकिन उन्होंने ये बयान ठीक 11 साल पहले बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के लिए दिया था. 11 साल में कुछ भी नहीं बदला, बदला हैं तो सिर्फ पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और किरासिन का भाव.
फिर 2004 में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक चार्जशीट पेश की थी, उसमें लिखा था –
“ एनडीए इकोनोमी के बारे में बड़े-बड़े दावे करता हैं,फिर भी देश की बड़ी आबादी रोज भूखी सोती हैं. दाम अभूतपूर्व स्तर को छु रहे हैं. 1994 में एक लीटर डीजल 7 रुपये 80 पैसे में मिलता था और 2004 में 20 रुपये 53 पैसे में ,पेट्रोल 11 रुपये 75 पैसे में एक लीटर मिलता था और 2004 में 33 रुपये 70 पैसे का. 1994 से 2004 तक रसोई गैस के दाम दोगुना हो गए हैं”.
चार्जशीट में आगे लिखा था कि “इंडिया सिर्फ एनडीए के लिए शाइन कर रहा हैं 21वीं सदी कांग्रेस पार्टी की हैं. देश की जनता ईमानदार और काम करने वाली सरकार चाहती हैं. कांग्रेस देश को ऐसी सरकार देगी”.
तो साहब, देश में सात साल से कांग्रेस की ‘ईमानदार और काम करने वाली सरकार’ हैं. इस सरकार के राज में डीजल 20 रुपये से बढ़कर 41 रुपये कुछ पैसे हो गया हैं और पेट्रोल 33 रुपये से बढ़कर 69 रुपये कुछ पैसे हो गया हैं. ये दिल्ली के रेट हैं, बाकी देश में और महंगा हैं. दाम लगभग दो गुना हो गए हैं. सरकार की दलील हैं कि 2004 में कच्चे तेल का दाम प्रति बैरल 36 डॉलर था, वो अब 110 डॉलर के आसपास हैं यानी लगभग तीन गुना. फिर भी देश में दाम दो गुना ही बढ़े और ये दाम बढाकर भी सरकार घाटे हैं.
सवाल ये हैं कि क्या ये गणित सोनिया गांधी या कांग्रेस पार्टी को चुनाव से पहले नहीं पता था? बिलकुल पता होगा, ना सिर्फ कांग्रेस को बल्कि बीजेपी को भी, पर वोट पाने के लिए महंगाई का रोना रोने में क्या बुराई हैं. बीजेपी भी अब उसी तरह से रो रही हैं जैसे कांग्रेस पार्टी रोया करती थी विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का बयान वैसा ही हैं जैसे सोनिया गांधी ने ११ साल पहले दिया था. सुषमा स्वराज ने ट्विट्टर पर लिखा हैं – “ पेट्रोलियम पदार्थों के दाम दसवीं बार बढ़ाये गए हैं, कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ का नारा देकर ये सरकार बनीं और आम आदमी को क्या मिला.आम आदमी की मुश्किलों के प्रति ये सरकार संवेदनशील नहीं हैं”
अब कांग्रेस का बयान देख लीजिए, पार्टी महासचिव जनार्दन दिवेदी ने कहा- “ कई बार सरकार को कड़े फैसले लेने पड़ते हैं,डीजल की कीमत बढ़ने से हर किसी को मुश्किल होगी,पर आप सारे तथ्य देखेंगे तो समझ जाएंगे कि दाम बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं था”. ये बयान तब के पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के करीब 12 साल पुराने बयान से मिलता जुलता हैं, उन्होंने एनडीए की सरकार 1999 में फिर बनने पर कहा था-“ हमें कड़े कदम उठाने पड़ेंगे. डीजल के बढ़े दाम वापस नहीं हो सकते. इससे आम आदमी पर बोझ पड़ेगा, लेकिन कोई चारा नहीं था”.
कांग्रेस और बीजेपी के पुराने बयान खोजने में काफी मेहनत करना पड़ी, सिर्फ ये साबित करने के लिए की सरकार किसी की भी हो कम से कम पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें काबू करने का प्लान किसी पार्टी के पास नहीं हैं. फिर भी इस पर पॉलिटिक्स उसी तरह से होती हैं, जैसे पिछली बार हुई थी. हर पार्टी जब सरकार में होती हैं तब उसे याद रहता हैं कि देश की जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल बाहर से आता हैं और उसकी कीमत सरकार घटा-बढ़ा नहीं सकती. जब दुनिया के बाजार में दाम बढ़ेंगे तब देश में भी बढ़ेंगे. सरकार से हटते ही कांग्रेस और बीजेपी दोनों ये बात भूल जाते हैं.
शनिवार, 21 अगस्त 2010
करोड़पति बहुमत में हैं!
१५वीं लोकसभा में ३१४ करोड़पति सांसद हैं
शनिवार, 7 अगस्त 2010
हाजी मस्तान ने कहा था-' मैंने कभी तस्करी नहीं की'
'Once Upon a time Mumbaai' पिछले हफ्ते देखी तो हाजी मस्तान से मुलाकात याद ताजा हो गया. हाजी मस्तान से मैं ठीक १९ साल पहले मुंबई में मिला था, तब दिल्ली से पढ़ाई खत्म करके मुंबई पहुंचे मुश्किल से दो महीने हुए थे. मस्तान तब अंडरवर्ल्ड से ' रिटायर' हो चुका था. ये इंटरव्यू इंदौर से निकलने वाले साप्ताहिक ' प्रभात किरण' में जुलाई १९९१ में छपा था. इंटरव्यू के अंश-रविवार, 18 जुलाई 2010
लादेन जिन्दा होगा तो वो भी हंसेगा
फिल्म कराची में रची-बसी हैं. हीरो अली हसन ९/११ के तीन दिन बाद अमेरिका में नौकरी करने निकलता हैं पर हमले से डरे अमेरिका में आतंकवादी समझकर वापस भेज दिया जाता हैं. कहां तो वो अमेरिका के न्यूज़ चैनल में काम करने चला था,पर कराची के डंका टीवी का रिपोर्टर बनकर रह जाता हैं. डंका टीवी के एडीटर -कम - मालिक उसे किसी लायक नहीं मानते.रह रहकर अमेरिका जाने का उसका सपना जाग जाता हैं.एजेंट उसे अमेरिका भेजने के बदले १० लाख रुपये मांगता हैं.इस बीच, डंका टीवी में भी उसकी नौकरी पर बन आती हैं. उसे मुर्गो की बांग के नेशनल कॉम्पिटिशन कवर करने एडीटर ये कहकर भेजता हैं कि अबकी बार स्टोरी ठीक से नहीं की तो नौकरी गई समझो. स्टोरी जिस तरह शूट होती हैं उसमे उसकी नौकरी जाना तय लगता हैं. तभी एडिट टेबल पर उसकी नज़र विजेता मुर्गे के मालिक नूर पाशा पर पड़ती हैं. हजार मुर्गियों का मालिक ओसामा का हमशक्ल हैं. अली नूर को फंसाकर उसका टेप बनाता हैं और ओसामा की अमेरिका को चेतावनी का टेप अपने ही चैनल के मालिक को १० लाख में बेच देता हैं. टेप भारत के चैनल से होते अमेरिका पहुंचता हैं. नकली टेप ऐसी आग लगाता हैं कि अमेरिका बिना सोचे समझे अफगानिस्तान पर हमला बोल देता हैं.
सोमवार, 8 फरवरी 2010
शालिनीताई का स्कूल
शालिनी ताई को मेरी श्रद्धांजलि.
सोमवार, 1 फरवरी 2010
गूगल की जय हो !
प्रमोद महाजन जब आईटी मंत्री बने थे तो उन्होंने मुम्बई में प्रेस कांफ्रेंस के बाद पूछा था कि सरकार आप लोगों के लिए क्या कर सकते हैं? ये वैसा ही सवाल था जैसा हर नेता हरेक आदमी से पूछता हैं और आदमी चौड़ा हो जाता हैं कि मुझे पूछा तो सही. मैंने महाजन के सवाल के जवाब में कहा था कि हिंदी का फॉण्ट और टाइपिंग का यूनीफोर्म सॉफ्टवेयर डेवेलप करा दीजिए. ये कोई १० साल पहले की बात होगी. उन दिनों में सी-डेक इस दिशा में काम कर रहा था, फिर भी जितने फॉण्ट होते थे उतने की-बोर्ड.हमारे इंदौर के वेबदुनिया वालों ने भी फोनेटिक की-बोर्ड बनाया था.ये सब प्रयोग होते-होते हिंदी का एक की-बोर्ड डेवलप हो गया जो अलग-अलग फॉण्ट पर भी चलने लगा.मैं तमाम कोशिश के बाद भी इस की-बोर्ड से हिंदी टायपिंग नहीं कर पाया.हिन्दी और अंगरेजी के अलग-अलग की-बोर्ड याद करना मुश्किल हैं.
खैर, गूगल ने करीब दो-ढाई साल पहले वो सॉफ्टवेयर ला दिया जिसके जरिये आप रोमन की-बोर्ड में टाइप करें और नागरी के शब्द लिखे. ये सॉफ्टवेर भी थोडा जटिल था, लिखा हुआ सेव करने में दिक्कत होती थी और उससे भी बड़ी परेशानी ये थी कि ये सॉफ्टवेयर बिना इंटरनेट के नहीं चलता था, पर गूगल ने इस साल की शुरुआत में कमाल कर दिया. ये सॉफ्टवेर आप अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं और मजे से टाइप कर सकते हैं.ये ब्लॉग मैंने आज ऑफ़लाइन लिखा हैं.गूगल ने वो कर दिया जो भारत सरकर हिंदी के लिए नहीं कर पायी. न प्रमोद महाजन न ही उनके बाद आने वाले आईटी मंत्री.
हालाँकि स्मार्टफोन के ज़माने में ये तकनीक अभी भी पीछे हैं,ब्लैकबेरी पर आप हिंदी में मेल क्या कुछ भी लिख पढ़ नहीं सकते. आई-फोन और माइक्रोसॉफ्ट से चलने वाले फोन में आप हिन्दी पढ़ सकते हैं और शायद बहुत मेहनत के बाद लिख सकते हैं यानी हिन्दी को अ़ब मोबाइल प्लेटफोर्म में एकसार करने वाली तकनीक की जरूरत हैं.उम्मीद हैं की बाज़ार का जोर भी ये जल्दी ही करा देगा.